माता चिंतपूर्णी का शक्तिपीठ जहां आकर सारी चिंताएं समाप्त हो जाती हैं

माता का यह मंदिर हिमाचल के ऊना जिले में स्थित है।

हिमाचल को देवी-देवताओं की नगरी भी कहा जाता है क्योंकि इस स्थान पर कई शक्तिपीठ हैं। ये है हिमाचल के एक शक्तिपीठ की जिसे देवी चिंतपूर्णी के नाम से भी जाना जाता है। इसे छिन्नमस्तिका शक्तिपीठ भी कहा जाता है। माता का यह मंदिर हिमाचल के ऊना जिले में स्थित है। पुराणों के अनुसार इस स्थान पर देवी सती के चरण गिरे थे।



ऐसा माना जाता है कि माई दास नाक के एक सारस्वत ब्राह्मण थे जो मां के भक्त थे। एक बार माता ने अपनी भक्त माई दास को इस स्थान पर दर्शन दिए और बताया कि यह उनका शक्तिपीठ है, जिसके बाद इस स्थान पर देवी का मंदिर बनाया गया। मंदिर में प्रवेश करते ही दाहिनी ओर एक बड़ा पत्थर है।


ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर देवी ने अपने भक्त माई दास को दर्शन दिए थे। महिषासुर का वध मां दुर्गा ने नैना देवी मंदिर के पास किया था। लेकिन देवी की उत्पत्ति इस स्थान पर देवताओं द्वारा मानी जाती है। इसलिए इस शक्तिपीठ का विशेष महत्व है। भक्त की यह मान्यता है कि मां के दर्शन मात्र से सभी चिंताएं और निराशा के बादल दूर हो जाते हैं।

मन में भक्ति और आशा का संचार होता है। भक्त मां से जो कुछ भी श्रद्धापूर्वक मांगता है, मां उसकी मनोकामना पूरी करती है। चैत्र और अश्विन नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और मंदिर में माता के मंत्रों की गूंज सुनाई देती है।


Entering the Heart of Christianity: A Journey of Embracing Faith

The Basis of Christianity: The fundamental idea of Christianity is that Jesus Christ is the Son of God and the Human Savior. Christians consider the Old and New Testaments of the Bible to be sacred texts. The New Testament tells the story of Jesus Christ's life, teachings, death, and resurrection, while the Old Testament offers the historical and prophetic background.

श्री चेंगलम्मा परमेश्वरी मंदिर आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में कलंगी नदी के तट पर स्थित है।

शुक्रवार और रविवार को बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और चेंगलम्मा की पूजा करते हैं। इस मंदिर का दरवाजा कभी बंद नहीं होता।

शहादत की अनूठी मिसाल मुहर्रम, इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम हिजरी संवत का पहला महीना होता है।

मुस्लिम धर्म के अनुसार मुहर्रम पैगंबर मुहम्मद और उनके साथियों के पोते इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है।

Bhagavad Gita, Chapter 2, Verse 14

Hindi (हिन्दी):
उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम्।
सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः॥

Meaning (Hindi):
अर्जुन कहते हैं: अगर मैं कर्म को नहीं करता हूँ, तो ये सभी लोग संकर (बाह्य शक्तियों के प्रभाव) के प्रजनक हो जाएँगे, और मैं कर्ता बनूँगा।

English:
Arjuna says: "If I do not perform my duty, all these people will be led astray by the influence of material desires, and I will be responsible for creating confusion in society."